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News Of Amar Ujala Related To Farming – Exclusive: मायके का हुनर ससुराल में आजमाया, कुम्हड़े की खेती से कमाल कर दिखाया

News Of Amar Ujala Related To Farming – Exclusive: मायके का हुनर ससुराल में आजमाया, कुम्हड़े की खेती से कमाल कर दिखाया

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रश्मि ने कुम्हड़े की खेती से खूब कमाया
– फोटो : अमर उजाला

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बांदा जिले में छोटा सा गांव है तारा। यहां ज्यादातर किसान गेहूं, तिल, उड़द और अन्य दालों की खेती अरसे से कर रहे हैं। इससे तीन-चार हजार से सात हजार प्रति बीघा तक कमाई होती है। दो साल पहले गांव की रश्मि के सुझाव पर उसके पति प्रवेश पटेल ने कुम्हड़े की खेती की। नतीजा यह हुआ कि कमाई पांच गुना तक बढ़ गई। रश्मि ने खुद खेतों पर काम करके सफलता की इबारत लिखी। पूरी कहानी बता रहे हैं शैलेश अवस्थी…

घाटमपुर (कानपुर) रश्मि की शादी 19 साल पहले बांदा के गांव तारा में प्रवेश पटेल से हुई। परंपरागत खेती से प्रवेश को खास आमदनी नहीं हो पाती थी। रश्मि के इरादे उसे ज्यादा दिनों तक घूंघट और घर की दहलीज तक नहीं रख सके। उसने खेतों की तरफ रुख किया। उसने पति को कुम्हड़े की खेती के लिए बमुश्किल राजी किया।

इससे कमाई पांच गुना बढ़ गई। अब घर-बाहर रशिम की कद्र बढ़ गई। पति ने सारे खाते रश्मि के नाम कर दिए। तारा गांव के ज्यादातर किसान आज भी परंपरा खेती पर निर्भर हैं। रश्मि ने बताया कि उसके मायके घाटमपुर में कुम्हड़े की खेती से अच्छी कमाई होती है।

पति प्रवेश से निवेदन किया कि वह भी कुम्हड़े की खेती का प्रयोग करे पर उसका माइंडसेट तोडऩा आसान नहीं था। इस काम में उसके 16 साल खप गए। विरोध और उपहास झेलना पड़ा। दो साल पहले प्रवेश पटेल ने एक बीघा जमीन में कुम्हड़ा लगाया और इससे उसे 50 हजार रुपये की आमदनी हुई।
उसने मायके में कुम्हड़े की खेती के गुर सीखे थे और उसका इस्तेमाल यहां किया। वह खुद निराई, गुड़ाई से लेकर फसल टूटने तक निगरानी ही नहीं करती, खुद भी काम करती हैं। कुम्हड़ा जून में बीच बोया जाता है। बुंदेलखंड में पानी की दिक्कत है,लेकिन कुम्हड़े की फसल मामूली बारिश में ही 90 दिन में तैयार हो जाती है।

प्रवेश पटेल ने बताया कि इसके पहले गेहूं, तिल या उड़द की फसल से चार बीघे में 20 से 40-50 हजार तक ही मिल पाते हैं। चार बीघे में कुम्हड़े से 2.68 लाख मिले और इस बार 4.5 बीघा में 250 कुंतल से अधिक कुम्हड़ा तैयार हुआ है। यह 1,500 से 2000 रुपये कुंतल की दर से बिकेगा।

कुम्हड़े का इस्तेमाल ज्यादातर पेठा बनाने में होता है और आगरा इसकी बड़ी मंडी है। दो साल पहले जानकारी न होने से गच्चा खा गए थे और कुम्हड़े की बाजार भाव से कम कीमत मिली थी। अब फोन पर मंडी से भाव लेते और अच्छा पैसा मिलने पर ही फसल बेचते हैं।
इस काम मेंं रश्मि मदद करती है। अब ट्रैक्टर, बाइक और सुविधा के सभी साधन हैं। भाइयों ने कुम्हड़े की खेती पर हाथ आजमाया है। तय किया है कि अब राजमा और स्ट्रावेरी की भी फसल उगाएंगे। पत्नी पर गर्व है। इसमें गांव की समता ने भी सहयोग किया।

रश्मि का रूटीन
एमए (समाजशास्त्र) से किया। सुबह चार बजे उठकर भैंसों और बकरियों को चारा। घर की सफाई के बाद भोजन बनाना। आशाबहू के रूप में 12 से 4 बजे तक दफ्तर और गांव में। 4 से 6 बजे तक खेती-बाड़ी का काम। 6 से 8 बजे तक गृहस्थी के काम और भोजन बनाना।

8 से 9 तक दो बेटोंं की पढ़ाई देखना। रात 10 बजे सो जाना। रश्मि ने बताया कि वह मायके में भी जिद करके पढ़ी। अब पढ़ाई ससुराल में काम आ रही है। एक बेटा बीए कर रहा और दूसरा 10 वीं में है। वह गांव की महिलाओं को जागरूक कर रही हैं।

बांदा जिले में छोटा सा गांव है तारा। यहां ज्यादातर किसान गेहूं, तिल, उड़द और अन्य दालों की खेती अरसे से कर रहे हैं। इससे तीन-चार हजार से सात हजार प्रति बीघा तक कमाई होती है। दो साल पहले गांव की रश्मि के सुझाव पर उसके पति प्रवेश पटेल ने कुम्हड़े की खेती की। नतीजा यह हुआ कि कमाई पांच गुना तक बढ़ गई। रश्मि ने खुद खेतों पर काम करके सफलता की इबारत लिखी। पूरी कहानी बता रहे हैं शैलेश अवस्थी…

घाटमपुर (कानपुर) रश्मि की शादी 19 साल पहले बांदा के गांव तारा में प्रवेश पटेल से हुई। परंपरागत खेती से प्रवेश को खास आमदनी नहीं हो पाती थी। रश्मि के इरादे उसे ज्यादा दिनों तक घूंघट और घर की दहलीज तक नहीं रख सके। उसने खेतों की तरफ रुख किया। उसने पति को कुम्हड़े की खेती के लिए बमुश्किल राजी किया।

इससे कमाई पांच गुना बढ़ गई। अब घर-बाहर रशिम की कद्र बढ़ गई। पति ने सारे खाते रश्मि के नाम कर दिए। तारा गांव के ज्यादातर किसान आज भी परंपरा खेती पर निर्भर हैं। रश्मि ने बताया कि उसके मायके घाटमपुर में कुम्हड़े की खेती से अच्छी कमाई होती है।

पति प्रवेश से निवेदन किया कि वह भी कुम्हड़े की खेती का प्रयोग करे पर उसका माइंडसेट तोडऩा आसान नहीं था। इस काम में उसके 16 साल खप गए। विरोध और उपहास झेलना पड़ा। दो साल पहले प्रवेश पटेल ने एक बीघा जमीन में कुम्हड़ा लगाया और इससे उसे 50 हजार रुपये की आमदनी हुई।


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